The Gac Thought's # 164

मैं तुझे मुड़के बड़े गौर से देखता हूं
आगे रस्ते में अब कितने कांटे होंगे
अब मेरे पांव पत्थर से हुए हैं
तेरे किसी कांटे का असर मुझ पर न होगा
रात होने पर जुगनू को साथ रखे हैं
सारे शहर में परिंदों को बैठा रखे हैं।
        ( Credit- Mr. Gac )

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