The Gac Thought's# 168

तुझे भूल जाऊं यह मुमकिन नहीं

हर राह में कांटे बिछाए रहता है

जख्मी पाव रुकते नहीं सिसकते नहीं 

तुझे याद कर कर के और तेज चलते हैं।


     ( Credit- Mr. Gac )





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