The Gac Thought's # 169

ऐ वक़्त ठहर जा आगे क्या होगा बता जा 

अभी कुछ संभला हूं पूरा संभलना है

कुछ वक्त इंतजार एतबार में गुजरा है

अभी सजने को कुछ उम्र बाकी है

रौशनी अक्सर अंधेरों से कहती है

मेरे वजूद की तू ही परछाई है

जो गया वो थोडे आयेगा

 तेरे ठहरने से ये वक्त बदल जाएगा।

    (Credit- Mr. Gac )







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