The Gac Thought's # 173

ये वक्त है तेरा गुलाम नहीं
अपनी मनमानीओ को हद में रहने का इल्म दे
इसके बदलने की आहट तक नहीं आती
जो संभल गया वो ठहर गया
जो अकड़ गया वो मिट गया।
      ( Credit- Mr. Gac )

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