The Gac Thought's # 175

मैं मुश्किल दौर से गुजरा
तुम कहीं साथ दिखाई नहीं दिए
टूटे बिखरे जज़्बातों को अकेले समेटे
तुम तब भी साथ नहीं थे
एक एक लम्हा वर्षों और सदियों सा लगा
तुम हौसला भी नहीं दिए
भूखे परिंदों ने जब चौखट पे मेरे डेरा डाला
दौड़ के हमने दाना डाला
वक्त शोर नहीं चुपके से आता है
कितनी कहानियां बयां कर जाता है।

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