The Gac Thought's # 176
अब रात छुप के बातें करती हैं
चांद से छुप के मुलाकाते करती हैं
जहन में अब भी तेरे उजाले का अंधेरा है
उलझी किस्मत को फिर सुलझाना है
डूबते सितारों को कल का याद दिलाना है
चांद से पहले इन सितारों को आसमा पर आना है
एक उम्मीद का आना और फिर बिखर जाना है
किनारे कश्तियों को डूबना
खामोश समंदर को देखना

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