The Gac Thought's # 180

कभी जुबा पे नहीं आई तेरी बेवफाई

तू समझ कब मोहब्बत की थी तुझसे                 जो निभाई नहीं गई।

अरमां अब भी है उसके दिल में मुझसे मिलने की

पर क्या करें अब मेरे दिल में मोहब्बत की जगह ही नहीं।


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