The Gac Thought #181

 अपनी हिचकियो का गुनहगार मत समझना

कमबख्त सर्द रातो ने कहर बरपाया है

हम भूले कुछ थे, मगर

सर्द रातों ने ढूंढना नहीं भुला

कुछ उम्मीदों की मौजे बिखर जाती हैं

रेत का ठिकाना अक्सर बदल जाता है।

      (Credit Mr. Gac)




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