A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
अपनी हिचकियो का गुनहगार मत समझना
कमबख्त सर्द रातो ने कहर बरपाया है
हम भूले कुछ थे, मगर
सर्द रातों ने ढूंढना नहीं भुला
कुछ उम्मीदों की मौजे बिखर जाती हैं
रेत का ठिकाना अक्सर बदल जाता है।
(Credit Mr. Gac)
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