A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
जब लम्हों ने पुकारा था
जिंदगी होश में थी
कमबखत अंधी और बहरी भी थी
वर्षों से नहीं कुछ लम्हों से थी।
(Credit: Mr.Gac)
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