A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
मुश्किलों का दौर कब जाएगा
कोई बताए मेरे जाने से क्या जाएगा
फिक्र की बंदीसे थोड़ा दम तो ले
आज मैंखाने में मातम है ठहरा
रुसवाईयों का इल्जाम मत दे
मेरे प्याले में आज फिक्र है ठहरी।
(Credit:Mr.Gac)
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