The Gac thought's #185

 मुश्किलों का दौर कब जाएगा

कोई बताए मेरे जाने से क्या जाएगा

फिक्र की बंदीसे  थोड़ा दम तो ले

आज मैंखाने में मातम है ठहरा

रुसवाईयों का इल्जाम मत दे

मेरे प्याले में आज फिक्र है ठहरी।

 (Credit:Mr.Gac)




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