A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
मैं न काटा न फुल तुम्हारे ज़हन में
ढुंढो कोई नींद में तुम्हे परेशा करता है
तुम्हारे गुनाहों का हिसाब मांगता है।
(Credit:Mr.Gac)
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