A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
ढुब रहा हू मगर कल उबर जाऊंगा
इक नई रोशनी बिखेर दुंगा
किनारे खड़े मातम न मनाओ
मायुस अंधेरो में इक उम्मीद की रोशनी जलाओ।
(Credit: Mr.Gac)
Comments
Post a Comment