The Gac thought's #187

ढुब रहा हू मगर कल उबर जाऊंगा

इक नई रोशनी बिखेर दुंगा

किनारे खड़े मातम न मनाओ

मायुस अंधेरो में इक उम्मीद की रोशनी जलाओ।

  (Credit: Mr.Gac)





Comments

Popular Posts