A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कभी पत्थर अपने घरों पे भी फेंका करो
सामने वाले की तसल्ली के लिए
ज़ख्म कितना गहरा होता है पता चल जाएगा।
(Credit:Mr.Gac)
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