The Gac Thought's#183

 तूने वक्त इतना दिया हम संभल ना सके  

तेरे जाने का हमें ऐतबार थोड़े हैं

खुशी में जीने की आदत कब सही

गमों की कश्ती पर खुशी भी अब पहरेदार है।

    (Credit: Mr.Gac)







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