The Gac thoughts#192

 रात अक्सर वो नींद में जगाती है 

मेरे आंखों में अश्क बन बह जाती है 

कोई ख्वाब पुरा क्यों नहीं होता

आखिर तुम दिन रात किये


रहता है

छोड़ जिद अब चल मेरे साथ

तुझे फरिश्तों की शोहबत करा दू

हर जिद तेरी पुरी करा दू 

तुझे फलक पे सितारे बना दूं

फिर आखिरी पहर चली जाती है

मां रूठ के ओझल हो जाती है

फिर सुरज से नजरें मिलाता हूं

आगे बढ़ने का जज्बा उठाता हूं

उम् की सांझ ढलने में अभी कुछ वक्त बाकी है

कल फिर सुरज से मिलने का वादा है।

   (Credit: Mr.Gac)








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