A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
साजिश तो अपनों ने की
दुश्मनों ने तो हौसला बढ़ाया
मेरे वजूद को मिटाने में मेरे पीछे पड़े रहे।
लोग समझते रहे
वो अपनी नाकामिया मिटाते रहे
सामने आते हैं बेदाग आईना बनकर
पीछे देखो सारा जिस्म ही दागदार है।
(Credit:Mr.Gac)
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