A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कहानियां वही है सिर्फ किरदार बदले है
अस़क वहीं है सिर्फ रूखसार बदले है
कत्ल होने पर कत्ल का सौदा हुआ
कत्ल का कोई तीमारदार न हुआ।
(Credit:Mr.Gac)
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