A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
तमाम उम्र जो आग से बचाए वो तमाशा बने
मेरी रूह अब भी आसपास है
कोई कपड़े अब इसे नहीं फबते।
(Credit:Mr.Gac)
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