The Gac thought,s#196


 मेरा जिस्म जो जला मैं देखता रह गया

 तमाम उम्र जो आग से बचाए वो तमाशा बने

 मेरी रूह अब भी आसपास है

 कोई कपड़े अब इसे नहीं फबते।

       (Credit:Mr.Gac)


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