The Gac thought's#197

 बड़े जोर जबरदस्ती किए रहते हैं

 खुद को मिटाने में एक पल भी नहीं छोड़ते हैं

 ना जाने क्यों खुद को अपने रस्ते का पत्थर समझते हैं

 कोई बताओ हम पत्थर ही रस्ते हैं।

         (Credit:Mr.Gac)



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