A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
खुद को पहचान लेना जरूरी है
आईना बन जाना जरूरी है
कब वक्त तेरा मुट्ठी से निकल जाए
अपने पीछे निशानियां बना जाना जरूरी है
शायद फलक के पार बैठा कोई निहारता होगा
दबे पांव नहीं शोर मचा के यहां से जाना होगा।
(Credit:Mr.Gac)
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