The gac thoughts


 मुश्किलें उतनी नहीं जितनी हम समझते हैं।

 मुफ्त का तजुर्बा तो देती है।

 निगाहें बयां है गवाही मुश्किल थोड़े हैं।

 ख्वाब झूठे हैं झूठे सही खुद को बहला ना तो अच्छा है।

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